Sunday, 4 May 2014

Speed Breakers Vs Life Obstacles





         Friends, क्या होता है जब आप smoothly अपनी गाड़ी चला रहे होते हैं और अचानक ही एक speed breaker आपके सामने आ जाता है ?
तब आप क्या करते हैं ?

क्या आप अपनी गाडी वहीँ रोक देते हैं और आगे बढ़ना छोड़ देते हैं ?

नहीं ! आप तो बस गाडी थोड़ी धीमी कर लेते हैं और breaker बीत जाने के बाद धीरे -धीरे अपनी speed बढ़ाने लगते हैं . Isn’t it ?

गाड़ी के मामले में हम सब यही करते हैं , पर जब अपने goals achieve करने की बात आती है , life में successful बनने की बात आती है तब लोग काफी differently behave करते हैं .

बहुत से लोग अपने लक्ष्य के मार्ग में आने वाले obstacles को स्पीड ब्रेकर्स के रूप में ना देख एक ऐसा dead end समझ लेते हैं , जहाँ से आगे नहीं बढ़ा जा सकता ;
और फिर वे अपने सारे efforts छोड़ देते हैं !

पर roads पर आने वाले speed breakers और life में आने वाले obstacles में कई similarities हैं ,और ये समानताएं हमें सीखाती हैं कि जैसे ब्रेकर आने पर हम रोड पर नहीं रुकते वैसे ही लाइफ में प्रोब्लेम्स आने पर भी हमे रुकना नहीं चाहिए।  आइये इनपे थोड़ा गौर करते हैं :

दोनों आने ही आने हैं :

ना हम बिना speed breakers के रोड पर चल सकते हैं और ना ही बिना ऑब्स्टैकल्स के life जी जा सकती है … ऐसा एक भी सफल इंसान नहीं मिलेगा जो आपको ये कहे कि वो बिना बाधाओं के ही सफल हो गया . इसलिए इस बात के लिए mentally prepared रहने में ही समझदारी है की goals achieve करने के efforts में रुकावटों का सामना करना ही पड़ता है .

दोनों ही important हैं :

अगर speed breakers न हों तो uncontrolled speed की वजह से बहुत से accidents हो सकते हैं ; उसी तरह life में आने वाली obstacles हमें गहराई से सोचने और समस्याओं का समाधान ढूंढने में expert बनाती हैं .

किसी ने कहा भी है कि किसी की सफलता इससे नहीं आंकी जानी चाहिए कि उसने लाइफ में क्या पोजीशन हासिल की बल्कि इससे आंकी जानी चाहिए की उसने इसे हासिल करने में कितनी बाधाएं पार की।

दोनों temporary हैं :

कोई रोड ऐसी नहीं होती कि जिसपे सिर्फ speed breakers ही हों , और न ही success का कोई रास्ता ऐसा होता है जिस पर सिर्फ बाधायें ही बाधाएं हों … ब्रेकर्स और बाधाएं दोनों ही temporary होते हैं , आते हैं , कुछ देर के लिए हमें प्रभावित करते हैं और फिर चले जाते हैं। पर अगर कोई इन्हे temporary ना मान कर permanent समझ ले तो वो success से दूर ही रह जाता है .

दोनों से निपटने के लिए आप कुछ अलग करते हैं :

पहले आप smoothly अपनी गाड़ी चला रहे होते हैं पर जब speed breaker आता है तो आप गाडी का acceleration कम करते हैं और break लगाते हैं …. ठीक इसी तरह जब life में obstacles आते हैं तो इनसे निपटने के लिए आपको कुछ अलग करना होता है , ज़रा सोचिये अगर driver breaker आने पर भी वही करता रहे जो वो कर रहा था तो क्या होगा …. उसे झटका लगेगा , और अगर speed अधिक है तो accident भी हो सकता है . Life में आने वाली problems से deal करने के लिए हमें कुछ अलग करना होता है . Obstacles हमारे normal course से एक deviation है और उससे निकलने के लिए हमे अपने approach …अपनी technique में भी changes लाने पड़ते हैं।

ज़रूरी नहीं कि वो दिखाई दें :

कई बार speed breaker का पता तब लगता है जब हम उसपर से गुजर चुके होते हैं , उसी तरह कई बार problems तभी समझ में आती हैं जब वे हमें नुक्सान पहुंचा चुकी होती हैं . ऐसे cases में हम बीते हुए को नहीं बदल सकते पर definitely हम आगे के लिए सावधान हो सकते हैं .

दोनों के कई forms होते हैं :

जैसे सारे स्पीड ब्रेकर्स एक जैसे नहीं होते , कोई कम bumpy होता हैतो कोई ज्यादा , उसी तरह लाइफ में आने वाली प्रोब्लेम्स भी अलग-अलग तरह की होती हैं। कुछ आसानी से solve हो जाती हैं तो कुछ बहुत समय लेती हैं। पर ये निश्चित है की अगर हम एफ्फोर्ट्स डालते रहें तो आज नहीं तो कल उनका solution मिल ही जाता है।

दोनों ही experience के बाद आसान बन जाते हैं :

जब आप एक ही रास्ते से बार -बार जाते हैं तो subconsciously उस रास्ते का map आपके mind में तैयार हो जाता है , आप ब्रेकर आने से पहले ही जान जाते हैं की वो आने वाला है और accordingly अपनी speed adjust कर लेते हैं . Life में भी जब आप किसी obstacle से पार पा लेते हैं तो आपके mind में उससे या उस जैसी problems से निपटने का blue print तैयार हो जाता है और next time वैसी ही समस्या आने पर आप आसानी से उसे solve कर लेते हैं .

Friends, आपने अपनी life के लिए जो भी goals set किये हैं उन्हें जी -जान से pursue कीजिये और इस बात के लिए तैयार रहिये कि उनके पूरा होने में तमाम बाधाएं आएँगी पर वे सभी road पे आने वाले speed breakers की तरह ही होंगी जो एक बार को आपकी speed कम तो कर सकती हैं पर आपको अपना सपना पूरा करने से रोक नहीं सकतीं.

All the best ! :)

Learn to know yourself! (अपने आप को जानना सीखें !)



                          
लोग दुनिया को जानने की बात तो करते हैं, पर स्वयं को नहीं जानते. जानते ही नहीं, बल्कि जानना ही नहीं चाहते. खुद को जानना ही दुनिया की सबसे बड़ी नियामत है. जो खुद को नहीं जानता, वह भला दूसरों को कैसे जानेगा? दूसरों को भी जानने के लिए पहले खुद को जानना आवश्यक है. इसलिए बड़े महानुभाव गलत नहीं कह गए हैं कि जानने की शुरुआत खुद से करो.

एक महात्मा का द्वार किसी ने खटखटाया. महात्मा ने पूछा-कौन? उत्तर देने वाले ने अपना नाम बताया. महात्मा ने फिर पूछा कि क्यों आए हो? उत्तर मिला- खुद को जानने आया हूँ. महात्मा ने कहा-तुम ज्ञानी हो, तुम्हें ज्ञान की आवश्यकता नहीं. ऐसा कई लोगों के साथ हुआ. लोगों के मन में महात्मा के प्रति नाराजगी छाने लगी. एक बार एक व्यक्ति ने महात्मा का द्वार खटखटाया- महात्मा ने पूछा-कौन? उत्तर मिला-यही तो जानने आया हूँ कि मैं कौन हूँ. महात्मा ने कहा-चले आओ, तुम ही वह अज्ञानी हो, जिसे ज्ञान की आवश्यकता है? बाकी तो सब ज्ञानी थे.

इस तरह से शुरू होती है, जीवन की यात्रा. अपने आप को जानना बहुत आवश्यक है. जो खुद को नहीं जानता, वह किसी को भी जानने का दावा नहीं कर सकता. लोग झगड़ते हैं और कहते हैं- तू मुझे नहीं जानता कि मैं क्या-क्या कर सकता हूँ. इसके जवाब में सामने वाला भी यही कहता है. वास्तव में वे दोनों ही खुद को नहीं जानते. इसलिए ऐसा कहते हैं. आपने कभी जानने की कोशिश की कि खुदा और खुद में ज्यादा फ़र्क नहीं है. जिसने खुद को जान लिया, उसने खुदा को जान लिया. पुराणों में भी कहा गया है कि ईश्वर हमारे ही भीतर है. उसे ढूँढ़ने की कोई आवश्यकता नहीं.

सवाल यह उठता है कि अपने आप को जाना कैसे जाए? सवाल कठिन है, पर उतना कठिन नहीं, जितना हम सोचते हैंे. ज़िंदगी में कई पल ऐसे आएँ होंगे, जब हमने अपने आप को मुसीबतों से घिरा पाया होगा. इन क्षणों में समाधान तो क्या दूर-दूर तक शांति भी दिखाई नहीं देती. यही क्षण होता है, खुद को पहचानने का. इंसान के लिए हर पल परीक्षा की घड़ी होती है. परेशानियाँ मनुष्य के भीतर की शक्तियों को पहचानने के लिए ही आती हैं. मुसीबतों के उन पलों को याद करें, तो आप पाएँगे कि आपने किस तरह उसका सामना किया था. एक-एक पल भारी पड़ रहा था. लेकिन आप उससे उबर गए. आज उन क्षणों को याद करते हुए शायद सिहर जाएँ. पर उस वक्त तो आप एक कुशल योद्धा थे, जिसने अपने पराक्रम से वह युद्ध जीत लिया.

वास्तव में मुसीबतें एक शेर की तरह होती हैं, जिसकी पूँछ में समाधान लटका होता है. लेकिन हम शेर की दहाड़ से ही इतने आतंकित हो जाते हैं कि समाधान की तरफ हमारा ध्यान ही नहीं जाता. लेकिन धीरे से जब हम यह सोचें कि अगर हम जीवित हैं, तो उसके पीछे कुछ न कुछ कारण है. यदि शेर ने हमें जीवित छोड़ दिया, तो निश्चित ही हमारे जीवन का कोई और उद्देश्य है. उस समय यदि हम शांति से उन परिस्थितियों को जानने का प्रयास करें, तो हम पाएँगे कि हमने उन क्षणों का साहस से मुकाबला किया. यही से हमें प्राप्त होता है आत्मबल और शुरू होता है खुद को जानने का सिलसिला.
हम याद करें उन पलों के साहस को. कैसी सूझबूझ का परिचय दिया था हमने. आज भी यदि मुसीबतें हमारे सामने आईं हैं, तो यह जान लीजिए कि वह हमें किसी परीक्षा के लिए तैयार करने के लिए आईं हैं. हमें उस परीक्षा में शामिल होना ही है. यानी खुद की शक्ति को पहचान कर हमें आगे बढ़ना है. जीवन इसी तरह आगे बढ़ता है.

यह बात हमेशा याद रखें कि जिसने परीक्षा में अधिक अंक लाएँ हैं, उन्हें और परीक्षाओं के लिए तैयार रहना है. जो फेल हो गए, उनके लिए कैसी परीक्षा और काहे की परीक्षा? याद रखें मेहनत का अंत केवल सफलता नहीं है, बल्कि सफलता के बाद एक और कड़ी मेहनत के लिए तैयार होना है. बस..

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Thursday, 24 April 2014

"अजनबी हमसफ़र ”


वो ट्रेन के रिजर्वेशन के डब्बे में बाथरूम के तरफ वाली एक्स्ट्रा सीट पर बैठी थी,
उसके चेहरे से पता चल रहा था कि थोड़ी सी घबराहट है उसके दिल में कि कहीं टीसी ने आकर पकड़ लिया तो।
कुछ देर तक तो पीछे पलट-पलट कर टीसी के आने का इंतज़ार करती रही।
शायद सोच रही थी कि थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगी।
देखकर यही लग रहा था कि जनरल डब्बे में चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें
आकर बैठ गयी, शायद ज्यादा लम्बा सफ़र भी नहीं करना होगा।
सामान के नाम पर उसकी गोद में रखा एक छोटा सा बेग दिख रहा था।
मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा पीछे से उसे देखने की कि शायद चेहरा सही से दिख पाए लेकिन हर बार असफल ही रहा।
फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ टिकाकर सो गयी। और मैं भी वापस से अपनी किताब पढ़ने में लग गया।
लगभग 1 घंटे के बाद टीसी आया और उसे हिलाकर उठाया।
“कहाँ जाना है बेटा”
“अंकल अहमदनगर तक जाना है” “टिकट है ?”
“नहीं अंकल …. जनरल का है …. लेकिन वहां चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें बैठ गयी”
“अच्छा 300 रुपये का पेनाल्टी बनेगा”
“ओह … अंकल मेरे पास तो लेकिन 100 रुपये ही हैं”
“ये तो गलत बात है बेटा ...पेनाल्टी तो भरनी पड़ेगी”
“सॉरी अंकल …. मैं अगले स्टेशन पर जनरल में चली जाउंगी …. मेरे पास सच में पैसे नहीं हैं ….
कुछ परेशानी आ गयी, इसलिए जल्दबाजी में घर से निकल आई… और ज्यदा पैसे रखना भूल गयी…. ” बोलते बोलते वो लड़की रोने लगी ...टीसी उसे माफ़ किया और 100 रुपये में उसे
अहमदनगर तक उस डब्बे में बैठने की परमिशन दे दी। टीसी के जाते ही उसने अपने आँसू पोंछे और इधर- उधर
देखा कि कहीं कोई उसकी ओर देखकर हंस तो नहीं रहा था।
थोड़ी देर बाद उसने किसी को फ़ोन लगाया और कहा कि उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे हैं …
अहमदनगर स्टेशन पर कोई जुगाड़ कराके उसके लिए पैसे भिजा दे, वरना वो समय पर गाँव नहीं पहुँच पायेगी।
मेरे मन में उथल-पुथल हो रही थी, न जाने क्यूँ उसकी मासूमियत देखकर
उसकी तरफ खिंचाव सा महसूस कर रहा था, दिल कर रहा था कि उसे पैसे दे दूं और कहूँ कि तुम परेशान मत हो … और
रो मत ….
लेकिन एक अजनबी के लिए इस तरह
की बात सोचना थोडा अजीब था। उसकी शक्ल से लग रहा था कि उसने कुछ खाया पिया नहीं है शायद सुबह से… और अब तो उसके पास पैसे भी नहीं थे।
बहुत देर तक उसे इस परेशानी में देखने के बाद मैं कुछ उपाय निकालने लगे जिससे मैं उसकी मदद कर सकूँ और फ़्लर्ट भी ना कहलाऊं।
फिर मैं एक पेपर पर नोट लिखा,
“बहुत देर से तुम्हें परेशान होते हुए देख रहा हूँ, जानता हूँ कि एक अजनबी हम उम्र लड़के का इस तरह तुम्हें नोट भेजना अजीब भी होगा और शायद तुम्हारी नज़र में गलत भी, लेकिन तुम्हे इस तरह परेशान देखकर मुझे
बैचेनी हो रही है इसलिए यह 500 रुपये दे रहा हूँ , तुम्हे कोई अहसान न लगे इसलिए मेरा एड्रेस भी लिख रहा हूँ…..
जब तुम्हें सही लगे मेरे एड्रेस पर पैसे वापस भेज सकती हो …. वैसे मैं नहीं चाहूँगा कि तुम वापस करो …..
"अजनबी हमसफ़र ”
एक चाय वाले के हाथों उसे वो नोट देने को कहा, और चाय वाले को मना किया कि उसे ना बताये कि वो नोट मैंने उसे भेजा है।
नोट मिलते ही उसने दो-तीन बार पीछे पलटकर देखा कि कोई उसकी तरह देखता हुआ नज़र आये तो उसे
पता लग जायेगा कि किसने भेजा।
लेकिन मैं तो नोट भेजने के बाद ही मुँह पर चादर डालकर लेट गया था।
थोड़ी देर बाद चादर का कोना हटाकर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कराहट महसूस की। लगा जैसे कई सालों से इस एक मुस्कराहट का इंतज़ार था।
उसकी आखों की चमक ने मेरा दिल उसके हाथों में जाकर थमा दिया …. फिर चादर का कोना हटा- हटा कर हर थोड़ी देर में उसे देखकर जैसे सांस ले रहा था मैं..
पता ही नहीं चला कब आँख लग
गयी। जब आँख खुली तो वो वहां नहीं थी … ट्रेन अहमदनगर स्टेशन पर
ही रुकी थी। और उस सीट
पर एक छोटा सा नोट रखा था …..
मैं झटपट मेरी सीट से उतरकर उसे उठा लिया .. और उस पर लिखा था …
Thank You मेरे अजनबी हमसफ़र..
आपका ये अहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगी …. मेरी माँ आज मुझे छोड़कर चली गयी हैं …. घर में मेरे अलावा और
कोई नहीं है इसलिए आनन – फानन में घर जा रही हूँ। आज आपके इन पैसों से मैं अपनी माँ को शमशान जाने से
पहले एक बार देख पाऊँगी …. उनकी बीमारी की वजह से उनकी मौत के बाद उन्हें ज्यादा देर घर में नहीं रखा जा सकता। आज से मैं आपकी कर्ज़दार हूँ…
जल्द ही आपके पैसे लौटा दूँगी। उस दिन से उसकी वो आँखें और वो मुस्कराहट जैसे मेरे जीने की वजह थे …. हर रोज़ पोस्टमैन से पूछता था शायद किसी दिन उसका कोई ख़त आ
जाये …. आज 1 साल बाद एक ख़त मिला … आपका क़र्ज़ अदा करना चाहती हूँ …. लेकिन ख़त के ज़रिये नहीं आपसे मिलकर …
नीचे मिलने की जगह का पता लिखा था…

Saturday, 19 April 2014

=चेतन भगत Quotes in Hindi=

                             


knowledge sakar
Quotes -1  in English
“The world’s most sensible person and the biggest idiot both stay within us. The worst part is, you can’t even tell who is who.”
—————————————————Chetan Bhagat


Quotes -1  in hindi
“दुनिया के सबसे समझदार व्यक्ति और सबसे बड़ा बेवकूफ दोनों हमारे भीतर है . सबसे बुरी बात यह  है, की तुम ये नहीं बता सकते की तुमे कौन हो ”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -2  in English
“Jealousy is a rather enjoyable emotion to watch.”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -2  in hindi
“ईर्ष्या देखने के लिए एक नहीं बल्कि सुखद भावना है.”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -3  in English
“Why should any guy want to be only friends with a girl? It’s like agreeing to be near a chocolate cake and never eat it. It’s like sitting in a racing car but not driving it.”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -3  in hindi
“क्यों कोई  आदमी केवल  एक लड़की के साथ दोस्ती करना चाहता है ? ये इस तरह सहमत होना की तरह  है जैसे चॉकलेट केक के पास है और उसे खा नहीं सकते , और एक रेसिंग कार में बैठे हुए है पर उसे चला नहीं सकते ”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -4  in English
“When a woman comes into your life, things organize themselves.”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -4  in hindi
“जब एक महिला आपके जीवन में आती है , चीजें अपने आप  संगठित होने लगती है.”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -5  in English
The word “future” and females is a dangerous combination.
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -5  in hindi
शब्द “भविष्य” और महिलाओं के एक खतरनाक संयोजन है.
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -6  in English
“A wise man can be a fool in love.”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -6  in hindi
“एक बुद्धिमान व्यक्ति प्यार में एक मूर्ख हो सकता है.”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -7  in English
“preety girls behave best when you ignore them”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -7  in hindi
“सुँदर लडकियाँ  सबसे अच्छा व्यवहार करती है जब आप उन्हें अनदेखा करते हो”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -8  in English
“Certificates from top US universities adorned the walls like tiger head in a hunter’s home.”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -8  in hindi
“शीर्ष अमेरिकी विश्वविद्यालयों से प्रमाण पत्र, एक शिकारी के घर में बाघ सिर उसकी दीवारों पर सजा हुआ सा लगता है .”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -9  in English
“Rules, after all, are only made so you can work around them”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -9  in hindi
“नियम, after all, इसलिए बना है की आप उसके  आसपास काम कर कर सको ”
————————————————–-चेतन भगत

Quotes -10  in English
“The word “future” and females is a dangerous combination.”
—————————————————Chetan Bhagat

Quotes -10  in hindi
भविष्य “शब्द” “और महिलाओं के एक खतरनाक संयोजन है.”
————————————————–-चेतन भगत

We will keep adding more Quotes from time to time.

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Thursday, 17 April 2014

Swami Vivekananda quotes in hindi


1.  बहता पानी और रमता जोगी ही शुद्ध रहते हैं | ~ स्वामी विवेकानंद


2.  हिंदू संस्कृति आध्यात्मिकता की अमर आधारशिला पर आधारित है। ~~स्वामी विवेकानंद


3.  पक्षपात सब बुराइयों की जड़ है | ~ स्वामी विवेकानन्द


4.  भय ही पतन और पाप का निश्चित कारण है | ~ स्वामी विवेकानंद


5.  ज्ञानी कभी किसी व्यक्ति कि स्वतंत्रता , समानता , सम्मान एयर स्वायत्तता को भंग नहीं कर्ता है | ~ स्वामी विवेकानंद

6.  आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम, ईमानदारी तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता है| ~ स्वामी विवेकानंद


7.  मन की दुर्बलता से अधिक भयंकर और कोई पाप नहीं है। ~ स्वामी विवेकानंद


8.  आपदा ही एक ऐसी स्थिति है,जो हमारे जीवन कि गहराइयों में अन्तर्दृष्टि पैदा करती है | ~ स्वामी विवेकानंद
9.  हम भारतीय सभी धर्मों के प्रति केवल सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं करते , वरन सभी धर्मों को सच्चा मानकर स्वीकार भी करते हैं | ~ स्वामी विवेकानंद


10.  महान त्याग से ही महान कार्य सम्भव है | ~ स्वामी विवेकानंद


11.  हमें लोहे के पुट्ठे और इस्पात के स्नायु चाहिए, जिनमें वज्र सा मन निवास करे |~ स्वामी विवेकानंद


12.  वस्तुएं बल से छीनी या धन से खरीदी जा सकती हैं, किंतु ज्ञान केवल अध्ययन से ही प्राप्त हो सकता है | ~ स्वामी विवेकानंद


13.  जितना अध्ययन करते हैं, उतना ही हमें अपने अज्ञान का आभास होता जाता है | ~ स्वामी विवेकानंद


14.  जिसके साथ श्रेष्ठ विचार रहते हैं, वह कभी भी अकेला नहीं रह सकता | ~स्वामी विवेकानंद


15.  वह नास्तिक है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता | ~ स्वामी विवेकानंद

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knowledge sakar

commitment ( ठान लिया तो क्या मुश्किल)

knowledge sakar
वाराणसी का गोविंद रिक्शा चलाने वाले निर्धन, अनपढ़ नारायण जायसवाल का बेटा है। एक कमरे के घर में रहने वाला गोविंद घर के आसपास चलने वाली फैक्टरियों और जेनरेटरों की तेज आवाजों के बीच पढ़ते वक्त कानों में रुई डाले रखता था। उसे पढ़ते देखकर लोग कटाक्ष करते- कितना भी पढ़ लो बेटा, चलाना तो तुम्हें रिक्शा ही है। गोविंद को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। उसके मन में तो एक ऐसा संकल्प था, जिसे दूसरों को बताना भी संभव नहीं था, सब हंसी जो उड़ाते। लेकिन झोपड़ी में रहने वाले उसी गोविंद जायसवाल को जब भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में चुने जाने की खबर मिली तो उसकी आंखों से आंसू बह निकले। अभावों और कटाक्षों से भरे जीवन को अपनी मेहनत, संकल्प और प्रतिभा के बल पर परास्त करने पर जो खुशी हुई, उसकी अभिव्यक्ति हंसी से नहीं, बल्कि आंसुओं से ही हो सकती थी। आंसू खुशी और दुख के ही नहीं, विजय के भी होते हैं।

अद्वितीय प्रेरणा के स्रोत

गोविन्द जैसे युवक, जो तमाम सीमाओं से ऊपर उठकर कुछ कर दिखाते हैं, समाज में अद्वितीय प्रेरणा के स्रोत बन जाते हैं। वे सिद्ध करते हैं कि कोई भी सीमा स्थायी नहीं होती, कोई भी बाधा अजेय नहीं होती। आपके पास साधन हों या नहीं, समर्थन हो या नहीं, सहयोग हो या नहीं, पृष्ठभूमि कितनी भी कमजोर क्यों न हो, यदि संकल्प अडिग है और उसे साकार करने के लिए कष्ट उठाकर भी मेहनत करने का जज्बा मौजूद है तो विजय निश्चित है। डेविड ब्रिन्क्ले ने कहा है कि एक सफल इंसान वह है जो दूसरों के फेंके पत्थरों का इस्तेमाल अपनी सफलता की नींव में करने का माद्दा रखता है।
गोविन्द अकेला उदाहरण नहीं है उन प्रतिभावान बच्चों का, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहते हुए भी तरक्की की ऐसी सीढ़ियां चढ़ गए जो सुख-सुविधासम्पन्न घरों के बच्चों को भी आसानी से नसीब नहीं हो पातीं। ये उदाहरण सिद्ध करते हैं कि लैम्प पोस्ट के नीचे बैठकर पढ़ाई करने वाले बच्चे सिर्फ बीते जमाने में ही नहीं होते थे। वे आज भी होते हैं और जब-तब अंधकार से भरे अपने परिवेश में सितारों की तरह चमचमा उठते हैं, अपने आसपास खुशियां बिखरते हुए, स्थितियां बदलते हुए। जिन्हें अपनी क्षमताओं में विश्वास है, वे असंभव को भी संभव बना सकते हैं, फिर पढ़ाई और कॅरियर की चुनौतियां तो कोई असंभव चुनौतियां हैं ही नहीं।
मणिपुर में इम्फाल की जेनिथ अकादमी में पढ़ने वाला मोहम्मद इस्मत, जिसने अभी सीबीएसई की बारहवीं की परीक्षा में 500 में से 495 अंक हासिल कर पूरे भारत में पहला स्थान प्राप्त किया, ऐसी ही एक कमाल की मिसाल है। गणित, रसायन शास्त्र, कला और गृह विज्ञान में सौ में से सौ अंक पाने वाले इस्मत को अंग्रेजी में 98 और भौतिक शास्त्र में 97 अंक मिले। एक प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के पुत्र इस्मत ने न सिर्फ अपने माता-पिता, विद्यालय या अपने थौबाल जिले का नाम रोशन किया, बल्कि उसने तो पूरे उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को गौरव दिलाया है, जहां का कोई भी बच्चा अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 'मेरिट' में शीर्ष पर नहीं आया था। पर असंभव कुछ भी नहीं है।

अटूट आत्मविश्वास

गोविन्द हो या फिर मोहम्मद इस्मत, एक बात जिसे आप बिल्कुल नजरंदाज नहीं कर सकते वह है उनका अटूट आत्मविश्वास। उन्हें अपनी कक्षा के दूसरे बच्चों की तरह न तो ट्यूशन मिलती है और न ही अच्छे स्कूल। न अतिरिक्त किताबें ही पढ़ने को मिलती हैं और न ही इंटरनेट जैसी कोई सहूलियत है। कई बार तो बुनियादी जरूरत की किताबें और यहां तक कि पढ़ाई में लगाने के लिए समय तक नहीं मिलता।
चंडीगढ़ में 'थिएटर एज' के नाम का एक गैरसरकारी संगठन झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाता है। इस बार भी समाज के सबसे गरीब तबके के बीस बच्चों ने इस संगठन के निर्देशन में पढ़ाई की और बीसों अच्छे अंक लेकर पास हो गए। अभाव सिर्फ आर्थिक नहीं होते और शायद आर्थिक अभावों का मुकाबला फिर भी आसान है, मगर शारीरिक अक्षमताओं, अपंगता, नेत्रहीनता जैसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थितियों से लड़ते हुए कठिन पैमानों पर खरा उतरना आसान नहीं। ऐसे में गुड़गांव के छात्र सुनीत आनंद चमचमाते सितारे के रूप में सामने आते हैं। आंख के कैंसर के रोगी सुनीत ने अस्पताल में दाखिल कराए जाने के बावजूद पढ़ने-लिखने के प्रति लगन नहीं छोड़ी और बारहवीं में करीब 89 फीसदी अंक लेकर आए। अंबिका खट्टर, क्षिप्रा कुमारी कर्दम, किरण टोकस..... और दर्जनों ऐसे ही दूसरे नेत्रहीन छात्रों ने बारहवीं की परीक्षा में अपने माता-पिता को गौरव दिलाया है और अब जीवन के अगले पड़ाव की तैयारी कर रहे हैं। मुंबई के राम रत्न विद्या मंदिर के गौतम गाबा को कितनी ही शाबाशी दी जाए, कम है, जिसने अस्थि कैंसर से पीड़ित होते हुए भी सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में 92 फीसदी अंक हासिल कर शीर्ष छात्रों की सूची में नाम दर्ज कराया। पिछले एक साल में सात महीने तक वह कैंसर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती था।

प्रतिभा सुविधाओं की मोहताज नहीं

इन छात्रों की सफलता एक बार फिर सिद्ध करती है कि प्रतिभाएं सुविधाओं की मोहताज नहीं होतीं और प्रतिभाओं को किसी भी किस्म की बाधा रोक नहीं सकती। ऐसे बच्चे कभी हमें डा. अंबेडकर की याद दिलाते हैं तो कभी लाल बहादुर शास्त्री की। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का जीवन भी तो ऐसे ही अभावों में गुजरा था। लेकिन जहां चाह, वहां राह। लिंकन ने बाद में कहा था- हमेशा याद रखो कि सफलता के लिए किसी दूसरी चीज की तुलना में सिर्फ एक बात अहमियत रखती है, और वह है तुम्हारा दृढ़ संकल्प।
झोपड़ियों के अंधेरे में बैठकर उजाले की तलाश करने वाले आज के नौनिहालों को भी अपने सामने खड़ी विकट चुनौतियों का अहसास है, लेकिन उन्हीं के भीतर से रास्ता निकालने के सिवाय कोई चारा भी नहीं है। ट्यूशन करते हुए अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने वाले गोविन्द ने आईएएस के लिए चुने जाने के बाद कहा था- 'मैं किसी छोटी सरकारी नौकरी के लिए तो चुना ही नहीं जा सकता था, क्योंकि वहां किसे लिया जाएगा, यह पहले से ही तय है। मैं जानता था कि मेरे पास आईएएस के सिवाय कोई चारा ही नहीं है और इसीलिए मैं डटा रहा।' धन्य हैं ये प्रतिभाएं जो कैसी-कैसी विडम्बनाओं के बीच से उभर रही हैं।

ऐसे में उन लोगों के लिए सहज ही श्रद्धा जगती है जो अभावग्रस्त बच्चों का जीवन बदलने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। मिसाल के तौर पर सुपर-30 नामक समूह का संचालन करने वाले आनंद कुमार, जो पटना में बरसों से वंचित, शोषित, पीड़ित और निर्धन परिवारों के तीस बच्चों को प्रतिवर्ष आईआईटी में दाखिले के लिए मुफ्त 'कोचिंग' देते आए हैं। साधारण से बच्चों को तराशकर कोहिनूर बनाना कोई उनसे सीखे। उनके पढ़ाए पच्चीस से ज्यादा बच्चे हर साल अपनी गरीबी को अलविदा कहते हुए विश्व के सर्वश्रेष्ठ तकनीकी संस्थानों में गिने जाने वाले भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों में प्रवेश पाते हैं। इस साल भी उन्होंने 27 गरीब छात्रों का जीवन बदल दिया। आनंद कुमार खुद भी अभावपूर्ण पृष्ठभूमि से आए हैं इसलिए उनके जज्बे को समझना मुश्किल नहीं है। उन्होंने बड़े-बड़े संस्थानों में ऊंचे पदों पर काम करने और मोटी तनख्वाह लेने के प्रस्ताव ठुकराते हुए गरीब छात्रों को निशुल्क 'कोचिंग' देने का रास्ता चुना। लेकिन वे बच्चे भी कम नहीं हैं जो अपने इस गुरू के विश्वास पर खरा उतरने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते।


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Wednesday, 16 April 2014

सफलता के लिए तीन नेटवर्क जरूरी हैं!

                               

......लक्ष्य को हासिल करने के आसान उपाय

कॅरिअर में आगे बढ़ने के लिए स्पष्ट लक्ष्य बना लें। इन्हें हासिल करने के लिए मजबूत नेटवर्क, पॉजिटिव सोच, प्रोडक्टिव आउटपुट, मेंटर के साथ कॅरिअर को शुरू करने जैसी कुछ बातों पर ध्यान दें। हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू ने मैनेजमेंट सब्जेक्ट्स के माध्यम से शिखर तक पहुंचने के कुछ टिप्स सुझाएं हैं-

कम अनुभवी मेंटर के साथ कॅरिअर शुरू करें

किसी अनुभवी मेंटर के साथ ही अपने कॅरिअर की शुरुआत न करें। क्योंकि यह जरूरी नहीं कि एक अनुभवी मेंटर आपको काम के बारे में सही जानकारी दे सके। कुछ मेंटर ज्यादा अनुभव मिलने के बाद लोगों से मिलना-जुलना छोड़ देते हैं। जिसका आपको नुकसान हो सकता है। इसलिए अपने कॅरिअर की शुरुआत कम अनुभवी मेंटर से करें। वे आपको प्रैक्टिकल नॉलेज और एडवाइस दोनों देंगे। (स्रोत- हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू ‘गाइड टू गेटिंग द मेंटरिंग यू नीड’)

तीन नेटवर्क बनाएं

सफलता के लिए तीन नेटवर्क जरूरी हैं। जबकि ज्यादातर लोग एक ही नेटवर्क पर फोकस करते हैं। अच्छे रिजल्ट के लिए तीनों नेटवर्क को डेवलप करें।
1. ऑपरेशनल नेटवर्क आज के लिए हैं। इसमें उन सभी लोगों को रखें जिन पर आप अपने काम के लिए निर्भर कर सकते हैं। इसमें करीबी लोगों को लिया जा सकता है।

2. डेवलपमेंटल नेटवर्क में अपने विश्वसनीय लोगों को रखें। उनसे आप सुझाव भी ले सकते हैं। कुछ ऐसे लोगों को चुनें जो
आपकी सोच को बदलने की क्षमता रखते हों।

3. स्ट्रेटेजिक नेटवर्क भविष्य के लिए है। यह आपको आने वाली सफलताओं के लिए तैयार करता है। इस नेटवर्क में उन लोगों को शामिल करें जो आने वाले समय में आपकी मदद करेंगे।
(स्रोत- ‘द थ्री नेटवर्क्‍स यू नीड’ बाय लिंडा हिल और केंट लाइनबैक)

धारणा न बनाएं बातचीत करें

दफ्तर में तनाव होना आम बात है। मुश्किलों के बाद भी प्रोडक्टिव आउटपुट देने की कोशिश करें। अच्छे नतीजों तक पहुंचने के तीन तरीके अपनाएं-
आप जानते हैं कि समस्याएं ज्यादा हैं। कुछ और मुश्किलें भी आ सकती हैं। इसलिए यह न देखें कि आप कौन हैं और कहां पर हैं। बल्कि दूसरों की बात सुनें, समझें और फिर रिएक्ट करें।
आप ये नहीं जानते कि दूसरा व्यक्ति क्या सोच रहा है। इसलिए कोई धारणा न बनाएं। दूसरे व्यक्ति से बातचीत करके उसके विचारों को जानने की कोशिश करें।
बिजनेस में किसी तरह की बहस को जंग न समझें। हार-जीत का फैसला करने की बजाय दूसरे व्यक्ति को बेहतर ढंग से समझें।
(स्रोत- ‘डिफिकल्ट कन्वर्सेशन, नाइन कॉमन मिसटेक’ बाय हौली वीक्स)

टैलेंट के लिए सफलता आसान

हर क्षेत्र में आर्टिफिशियल टैलेंट की बजाय नेचुरल टैलेंट को पसंद किया जाता है। इसलिए अपने काम और व्यवहार में नेचुरल रहें। सफलता के लिए जरूरी नहीं कि आप कौन हैं लेकिन यह जरूरी है कि आप क्या कर रहे हैं। ध्यान रखें-

स्पेसिफिक गोल बनाएं

यह न कहें कि आप अपनी अलमारी को हफ्ते में तीन दिन साफ करेंगे। बल्कि अपने कैलेंडर में तीन दिन मार्क कर लें जब आप अलमारी की सफाई करेंगे। इसी तरह से अपने काम के लिए स्पेसिफिक गोल बनाएं।

जो करना है उस पर ध्यान दें

आप अपने गुस्से से परेशान हैं और इस आदत को बदलना चाहते हैं। तो इस बात पर फोकस करें कि अगली बार गुस्सा आने पर आप किस तरह से खुद पर काबू रखेंगे।

(स्रोत-‘नाइन थिंग्स सक्सेसफुल पीपुल डू डिफ्रेंटली’ बाय हेडी ग्रांट हैल्वोरसन)

जरूरी चीजों पर ध्यान दें

पहले मैनेजर्स परफॉर्मेस रिव्यू, प्लान या स्ट्रेटेजी पर फोकस करते थे। लेकिन अब कस्टमर, ऑपरेशंस, मार्केट, कंपिटीटर डाटा पर ध्यान देते हैं। इन तीन तरीकों से डाटा को सही तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

सब कुछ सीखने की बजाय उन्हीं चीजों पर ध्यान दें जो आगे बढ़ने में मददगार साबित हो। इससे काम में आसानी होगी और नतीजे भी अच्छे मिलेंगे।
किसी एक व्यक्ति की बात को अंतिम सच न समझ लें। एक बात या घटना को लेकर हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है। इसलिए दिमाग से काम लें।

डाटा को सही तरीके से समझने के लिए टीम की मदद लें। डाटा में बदलते ट्रेंड्स पर उनकी राय भी जानें।
(स्रोत- ‘मैनेजिंग द इन्फॉर्मेशन इवलांचे’ बाय रोन अशकेनास)


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